Posted by
Pankaj Trivedi
In:
धर्म
त्रिपर्व - शुभकामना
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः
निर्विघ्नं कुरुमेदेव सर्व कार्येषु सर्वदा ॥
आज गणेश चतुर्थी है | गण याने समूह-
जाति | पति याने स्वामी | आज के इस शुभ दिन पर हम सब पर गणेशजी के आशीर्वाद रहे... | गणेशजी बड़ा सर देखकर लगता है कि इतना भारी कैसे उठाते होंगे? गणेशजी का पूरा शरीर हम इंसानों के लिएँ प्रतीकात्मक सन्देश है | उनके जैसा बड़ा सर याने कि बड़ी सोच रखनी चाहिए | छोटी सी आँखों का अर्थ है, हमें इस समाज को बड़ी झीनी-झीनी नज़रों से देखना है, बारीकी से अभ्यास करना है या सतर्क रहना है | बड़े कान याने सब लोगों को सुनना है | किसी की भी अवगणना नहीं करनी चाहिएं हमें | लम्बी नाक याने आनेवाली हर खुशी और मुश्किल को सूंघकर सजग रहना है, दूसरा अर्थ यह की हमें आसपास की प्रकृति की सुगंध से प्रफुल्लित रहना है | मतलब कि सृष्टि पर प्रकृति को संभालकर रखनी है और यही जीवन देती है | बड़ा पेट याने हमें गगरी के सामान सबकी सूनी हुई बातें, सुख-दुःख को अपने पेट में सामना है | किसी की बातों को इधर से उधर नहीं कहनी है | छोटे पैर याने जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किल आये या चुनौती आये तो हारना नहीं है | बड़े भाई कार्तिकेय ने बह्मांड की परिक्रमा भले ही की थी, मगर बुद्धिवान गणे
शजी ने माता पार्वती और
पिता महादेव को बिठाकर ही परिक्रमा कर ली थी | मतलब की धर्यवान, चातुर्यवान, बुद्धिवान बनाना है हमें | आज के गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर गणेशजी यही संदेश देते हैं |
जाति | पति याने स्वामी | आज के इस शुभ दिन पर हम सब पर गणेशजी के आशीर्वाद रहे... | गणेशजी बड़ा सर देखकर लगता है कि इतना भारी कैसे उठाते होंगे? गणेशजी का पूरा शरीर हम इंसानों के लिएँ प्रतीकात्मक सन्देश है | उनके जैसा बड़ा सर याने कि बड़ी सोच रखनी चाहिए | छोटी सी आँखों का अर्थ है, हमें इस समाज को बड़ी झीनी-झीनी नज़रों से देखना है, बारीकी से अभ्यास करना है या सतर्क रहना है | बड़े कान याने सब लोगों को सुनना है | किसी की भी अवगणना नहीं करनी चाहिएं हमें | लम्बी नाक याने आनेवाली हर खुशी और मुश्किल को सूंघकर सजग रहना है, दूसरा अर्थ यह की हमें आसपास की प्रकृति की सुगंध से प्रफुल्लित रहना है | मतलब कि सृष्टि पर प्रकृति को संभालकर रखनी है और यही जीवन देती है | बड़ा पेट याने हमें गगरी के सामान सबकी सूनी हुई बातें, सुख-दुःख को अपने पेट में सामना है | किसी की बातों को इधर से उधर नहीं कहनी है | छोटे पैर याने जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किल आये या चुनौती आये तो हारना नहीं है | बड़े भाई कार्तिकेय ने बह्मांड की परिक्रमा भले ही की थी, मगर बुद्धिवान गणे


Posted on
undefined
undefined -
5 Comments
This entry was posted on 9:05 PM and is filed under धर्म . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
5 comments:
आपको बहुत सारी बधाइयाँ..
आज हरितालिका तीज है.. सुहागिनों के लिए पर्व और त्यौहार.
सौरभजी, आपने हरितालिका तीज याद दिलाई, धन्यवाद |
आपको भी बधाई |
शिक्षाप्रद और ज्ञानवर्धक अमूल्य आलेख के लिए आपका आभार ! हार्दिक शुभकामनाएँ !
सादर शुभप्रभात !!!
गणेश चतुर्दशी पर आप को शुभकामनाएं |
और इस सुन्दर लेख को हम तक पहुचाने के लिए धन्यवाद !!
प्रिय नरेन्द्र और डॉ. नूतन अमृता,
त्रिपर्व शुभकामनाएं स्वीकार करके अपनी प्रतिक्रिया देने के लिएँ धन्यवाद |
Post a Comment