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Pankaj Trivedi
In:
कविता
भोर हुई - पंकज त्रिवेदी
भोर हुई
चिड़िया चहचहाने लगी
सूरज निकला
किरणे मुस्कुराने लगी
फूल खीले
कलियाँ शरमाने लगी
सुबह की ओस की बूँदें
कान में
कह रही है...
सुप्रभात...
अब जाग भी जाओ
यही मौक़ा है....
एक बार जाग गए तो...
ज़िंदगी के हर लम्हें से
ताज़गी और खुशबू मिलेगी....
जीवन सँवर जाएगा और
अपने
हमसफ़र दोस्तों का भी.... !!
8 , अगस्त, 2010
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