Posted by
Pankaj Trivedi
In:
चार लाइन
चार लाइन - पंकज त्रिवेदी
तुम्हारा यूंही रूठना हमें रास आता नहीं
हम वो नहीं जो मनाते रहें प्यार के लिए
हम वो सावन है जिसे कोइ रोक नहीं सकता,
तुम देखो तो सही, हम कितने बरसते हैं?
Posted on
undefined
undefined -
7 Comments
This entry was posted on 11:38 AM and is filed under चार लाइन . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
7 comments:
क्या खूब कही.... वाह वाह
બહોત અચ્છે, પંકજભાઇ!
કલ્પના અને કવિ કિરણભાઈ, આપ બંને નો આભાર
wah wah ! what a beahty !! sookhe khandharon me kuchh makka abhee bhee aabad hain...!
sadhuwad !
bahut khoob likha hai pankaj ji ne.... vaah...
डॉ. आपका धन्यवाद
नरेन्द्र,
बहुत खुशी हुई | ये चार लाइन पर फेसबुक आफ़रीन हो गया था... !
Post a Comment