Posted by
Pankaj Trivedi
In:
चार लाइन
बस आपके लिए - पंकज त्रिवेदी
अपनी हसरतों को दबाकर जीते हैं
ईस गम को छुपाकर जीते हैं
क्या लूंटेगा ज़माना खुशियाँ मेरी
हम तो बस आपके लिए जीते हैं !
क्या लूंटेगा ज़माना खुशियाँ मेरी
हम तो बस आपके लिए जीते हैं !
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