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Pankaj Trivedi
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सूक्तियां
कार्य (कर्म)
1. कर्म तो कामधेनु है, उसे दुहना आएं तो आनंदरूप दूध मिलेगा |
- श्री वल्लभाचार्य
- श्री वल्लभाचार्य
2. रूप या जन्म गौरव के कारण नहीं बनाते, इन्सान अपने कर्म से ही शोभा बढ़ा सकता है | - पंचतंत्र
3 . जिसकी जीभ (ज़बान) छोटी, उसका कार्य बड़ा ; जिसकी
जीभ बड़ी, उसका कार्य छोटा | - गुजराती कहावत
जीभ बड़ी, उसका कार्य छोटा | - गुजराती कहावत
4 . कर्म का ध्वनी शब्द से भी ऊंचा है | - जापानी कहावत
5 . कर्म के स्वरूप का विचार करने से नम्रता आती है और धर्म का विचार करने से निर्भयता आती है |
- हितोपदेश
- हितोपदेश
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2 comments:
बहुत सुन्दर कथन ...
Mahendra ji, thank you...
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