मैं सत्य : भावना सक्सेना
क्या कहा-
पहचाना नहीं!
अरे सत्य हूँ मैं.............
युगों युगों से चला आया।
हाँ अब थक सा गया हूँ,
जीवित रहने की तलाश में
आश्रय को ही भटकता,
हैरान.........
हर कपट निरखता।
आहत तो हूँ, उसी दिन से
जब मारा गया
अश्वत्थामा गज
और असत्य से उलझा
भटकता है नर
कपटमय आचरण पर
कोढ़ का श्राप लिए।
गाँधी से मिला मान,
गौरव पाया.....
रहूँ कहाँ......
जब गाँधी भी
वर्ष में एक बार आया।
कलपती होगी वह आत्मा
जब पुष्पहार पहनाते,
तस्वीर उतरवाने को.....
एक और रपट बनाने को....
बह जाते हैं लाखों,
गाँधी चौक धुलवाने को,
पहले से ही साबुत
चश्मा जुड़वाने को
और बिलखते रह जाते हैं
सैकड़ों भूखे
एक टुकड़ा रोटी खाने को।
चलता हूँ फिर भी
पाँव काँधों पर उठाए।
झुकी रीढ़ लिए
चला आया हूँ
आशावान.......
कि कहीं कोई बिठाकर.....
फिर सहला देगा,
और उस बौछार से नम
काट लूँगा मैं
एक और सदी।
मैं रहूँगा सदा
बचपन में, पर्वत में,बादल में,
टपकते पुआली छप्पर में,
महल न मिले न सही
बस यूँ ही..........
काट लूँगा मैं
एक और सदी।
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13 comments:
अधयात्म के गुढ़ रहस्य को बताती बहुत ही सुंदर आपकी रचना.....
एक साथ कई भावों को संजोये
अच्छी रचना हेतु बहुत बहुत बधाई भावना जी , मुझे लगता है कि आप का नाम ग़लत छप गया है "भावना सक्सेना" होना चाहिये था, भावना सस्केना छप गया है |
सुन्दर कविता .. कई रंगों के भावों को सजाये संजोये..
Nirmal Paneri
वाह आज के परिपेक्ष्य में देश के हालातों का दुखिः मन से शब्दों के रूप में व्यक्त करता परिद्रश्य अश्वत्थामा और असत्य से उलझा भटकता नर का अच्छा शाब्दिक नोट ...सुन्दर लेखन
देवेन्द्र नाथ मिश्रा January 29 at 11:35pm Reply • Report
इस सुन्दर कविता में सत्य की यात्रा का विवरण है और रास्ते के कुछ महत्वपूर्ण पडावों का | जैसे पहला इस पर प्रहार अश्वत्थामा प्रकरण के समाया हुआ | इसे सहारा दिया गांधीजी ने | फिर भी आज भी इसको किसी के जीवन में वोह स्थान नहीं मिला जो
मिलना चाहिए था | वर्तमान स्थिति पर टिपण्णी भी; सभी भावनापूर्वक दृष्टिकोण के साथ | बधाई |
सुंदर कविता| बधाई भावना जी|
Sanjay Mishra Habib January 30 at 9:54am Reply • Report
पढ़कर अपनी एक ग़ज़ल का मतला स्मरण हो आया...
"कभी ना दिल में ये अफ़सोस रहे
हम सत्य के साथ थे, मगर खामोश रहे"
भावना जी को इस विचारोत्तेजक कविता के लिए साधुवाद...
सत्य है, सत्य को आज संबल की आवश्यकता है...
राष्ट्रपिता को नमन...
उत्साहवर्धक टिप्पणियों को लिए आप सभी का हार्दिक धन्यवाद।
bhaavna ji ki kavita gandhi ji kee sahadat par is din publish huvi bahut sahi samay... Kavita bhi bahut gehre arthon ko liye huve... badhai..
सुंदर कविता| बधाई भावना जी|
bahut achhi rachna, shubhkaamnaayen.
उपेक्षा से किंचित दुखी,फिर भी आशावान
सत्य को शब्द दिए आपने ! सुन्दर ,सार्थक रचना !
भावना जी आपकी रचना पढ़ कर अच्छा लगा ,सत्य परेशां हो सकता ही पर पराजित नहीं हो सकता ..सादर आभार
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