मछली और मक्खी
राबिया बसरी कुछ संतों के साथ बातें कर रही थी । वहाँ हसन बसरी आया और बोले; "चलो, हम तालाब के पानी के पास बैठकर आध्यात्म की चर्चा करें । "
हसन को पानी पर चलने की सिद्धि प्राप्त हुई थी । उसी का प्रदर्शन करने के लिए वह उतावले हुए थे । उनके इरादे को राबिया समझ गयी थी । उसने कहा; "भाई, हम दोनों आकाश में उड़ते-उड़ते ही बातें करें तो कैसा रहेगा?" (राबिया के बारे में कहा जाता था की वह हवा में उड़ सकती थी )
और फिर गंभीर होकर उसने कहा; "भाई, जो आप कर सकतें हैं वह तो एक मछली भी कर सकती है । मैं जो करती हूँ वो तो मक्खी भी कर सकती है । मगर उस चमत्कार से भी कोई बड़ी चीज़ है । जिसे हमें विनम्रता से ढूँढनी चाहिए ।
This entry was posted on 9:48 PM and is filed under प्रेरक प्रसंग . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.
7 comments:
sahi kaha.. chamatkar se bada bhi kuch hota hai..
A Silent Silence : Mout humse maang rahi zindgi..
Banned Area News : Mano Ya Na Mano 2 Brings Two Mind Boggling Tales
आदरणीय पंकज जी
श्रेष्ट प्रेरक बोध कथा पढ़ कर मन को बहुत सुख और शांति का एहसास हुआ । आभारी हूं !
गुणों की सीमा नहीं , विनम्रता ही सबसे बड़ा गुण है शायद …
मेरा एक राजस्थानी दोहा आपको सादर समर्पित करना चाहता हूं …
फळ लागी डाळ्यां झुकै , निंवण मांय गुण वास !
थोथा फुगना गैस रा अकड़्यां उडै अकाश !!
अर्थात् " जिन शाखाओं पर फल लगे हों वे ही झुकती हैं , गुणवान ही नत होते हैं ; नम्रता में ही गुणों का वास होता है । मूर्ख और गु्णहीन ही दंभ करते पाए जाते हैं , जैसे गैस के खोखले गुब्बारे आसमान में उड़ते देखे जाते हैं । "
शुभकामनाओं सहित …
- राजेन्द्र स्वर्णकार
सोनल, तुम्हारा धन्यवाद... मैंने कमेन्ट दिया था आज, तुम्हारे ब्लॉग पर...
राजेन्द्रजी,
आपका फ्रिदयापूर्वक आभारी हूँ | आपने राजस्थानी में लिखाकर अर्थात समजाया, धन्यवाद
भाई साब ,
प्रणाम !
एक प्रेरणा प्रद कटा हमारे सामने रखी है विन्रम तो वो ही है जो झुक कर फल प्रदान करे ! ज्ञान मिला है हमे .
आभार !
सादर !
प्रिय सुनिल,
तुम ब्लॉग पर आये और तो बहुत अच्छा लगा | साहित्य की कोइ भी विधा हो, उनसे हमें कुछ न कुछ सीखने जरुर मिलता है | हमें सभी विचार को हकारात्मक अभिगम से लेना होता है |
बहुत शिक्षाप्रद और प्रेरणादाई प्रसंगवश से हमे साक्षात् करवाने हेतु आपका बहुत आभार ! हम जीवन में इसमें निहित सन्देश को आत्मसात करने को भरसक कोशिश करेंगे..! प्रणाम !
Post a Comment