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Pankaj Trivedi
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गुर्जरी
स्वर्गीय दुला भाया काग
गुजराती लोकगायक स्वर्गीय दुला भाया काग के एक दोहरे का अर्थ कुछ इस प्रकार है - "सूखे घास के पूले के गंज में अगर आग लगे तो उसे बुझाने के बदले जितने पूले को बचा सके उसे बचना चाहिए |" (मतलब कि समाज में विकृति की आग बेकाबू होती जाती है, तब हम अपने को उससे बचा सकें तो अच्छा |)
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2 comments:
भाई साब प्रणाम !
लोकगायक स्वर्गीय दुला भाया को शत शत नमन ! वो किस प्रकार के भजन आदि गाया करते थे , तथा किस समय रहे होंगे ?
ये भी बड़ी बात है कि आप इस प्रकार के व्यक्तित्व को हमारे सामने रखा , ये भी निश्चित है कि कोणी विभूति ही थी जिन को डाक टिकट को उन्हें प्रकाशित करने का गौरवमिला ,
नमन !
सुनील,
सही कहा | कवि काग वाकई बड़ी विभूति थी | मैंने डाक टिकट की फोटो जान बूझकर ही लगाई थी | ताकि पाठकों को अंदाजा लगे...| उनके बारे में परिचय आलेख लिखूंगा | थोडा समय जरूर लगेगा मगर कुछ ऐसे बड़े लोगों का परिचय भी देना है... "विश्वगाथा" पर |
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