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Pankaj Trivedi
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प्रेरक प्रसंग
प्रेरक प्रसंग : निंदा
शेख सादी छोटे थे तब की बात है | वह छोटे थे तब पूरी रात क़ुरान पढ़ रहे थे | उस वक्त पास में बैठे कुछ लोग गहरी नींद में सो रहे थी |
यह देखकर शेख सादी ने अपने अब्बाजान से कहा; "बाबा, देखो न, लोग कैसे होते हैं ? खुदा की नमाज़ पढ़ना तो दूर की बात, कोइ सर उठाकर मेरी ओर देखते भी नहीं !"
यह सुनकर शेख के अब्बाजान बोले; " बेटा, तू भी ईन लोगों की तरह सो गया होता तो अच्छा था, जिसकी वजह से तू उन लोगों की निंदा तो नहीं करता... !!"
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4 comments:
सार्थक ।
सार्थक ।
एक बहुत ही अच्छी शिक्षा मिली इस प्रेरक प्रंसग से. प़र निंदा से बड़ा कोई पाप नहीं है. आभार आदरणीय पंकज जी !
श्रीमान अरुणेश जी,
आप ब्लॉग पर पधारे और एक ही शब्द में सबकुछ कह दिया... धन्यवाद |
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