मीरांबाई
प्रिय दोस्तों,
आजसे आपको मूल गुजराती साहित्यकारों की रचनाओं का हिन्दी अनुवाद पढ़ने को मिलेगा... जिसे आप "गुर्जरी" के अंतर्गत पढ़ सकते हैं |
मेरी कोशिश है कि "विश्वगाथा" सही मायने में सभी भाषाओं का मंच बनाकर रहे | जिसमे गद्य और पद्य की सभी विधाएं भी शामिल हों |
गुजरात के द्वारिका में भगवान श्री कृष्ण राजा थे और उनके प्यार में बावरी मीरां ने मेवाड़ छोड़कर द्वारिका में विराजमान राजराजेश्वर श्रीकृष्ण की मूर्ति में खुद को विलिन किया | गुजराती भाषामें आद्यकवि श्री नरसिंह मेहता से भी पहले मीरांबाई है | "गुर्जरी" के प्रथम चरण में मीरां को रखने कारण यह भी है कि वह राजस्थान से आई थी | श्री कृष्ण भी मथुरा से गुजरात में आएं थे | उनकी परम्परा को मैं भाषा-साहित्य के द्वारा प्रांत को भी जोड़ना चाहता हूँ | मेरा यह नम्र प्रयास आपको पसंद आयेगा, ऐसा मानना गलत नहीं होगा | आप सब के प्यार की आशा में...
उम्मींद है कि मेरा यह निर्णय आपको पसंद आयेगा और "गुर्जरी में आपको गुजराती भाषा के परिवेश और मिट्टी की सुगंध महसूस होगी |
------------------------------------------------------------------------------------------ बसों मेरे नैनं मैं नंदलाल
मोहनी मूरत साँवरी सूरत नैना बने विसाल |
अधर सुधारस मुरली राजति उर बैजंती माल ||
छुद्र घंटिका कटि तट सोभित नूपुर सबद रसाल |
मीरा प्रभु संतन सुखदाई भगत-बछल गोपाल ||
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14 comments:
बढ़िया पोस्ट , बधाई !
बढ़िया प्रयास दो भाषों के बीच सेतु का काम करने का.. सफलता की कामना सहित .. आभार
माँ मीरा के चरण कमल की वंदना करते हुए बस ये ही कहूँगा...
..मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई..
dhanyavad.... pankaj ji
kya sundar laya se varNit hai...
आपका सार्थक प्रयास अपने उद्येश्य को प्राप्ति करे.. शुभकामनाएँ
bahut hi badhiyaa sabko ek sutra me baandhne ka
jaankari ke liye abhaar,
achhi koshish ki he aapne
अत्यंत ही सराहनीय प्रयास. अवश्य ही सफलता मिलेगी आपको. शुभकामना सदा साथ है.
सराहनीय प्रयास है ये पंकज भाई| हमारे लायक कोई सेवा हो तो निस्संकोच एवम् साधिकार बताने की कृपा करें|
bahut sundar pankaj ji.. sarthak prayaas... aur " Basho more nenan me nandlaal " ne mujhey meri sangeet kee kakshon kee yaad dila dee jaha ham is par Raag chada kar gaya kartey they... apka dhanyvaad... ham anya nayi post kee intjari rahegi... Sadar
Hmm! Manmohak Manmohna!
sundar post!
shubhkamnayen!
मेरे दोस्तों,
सुप्रभात.... आपके स्नेह से मैं भावविभोर हूँ | "गुर्जरी" में मैं आपके सामने गुजराती कविताओं का हिन्दी अनुवाद रखूंगा | जो हमारे लिएँ संवेदना, संस्कृति और संभावनाओं का भी सेतू रचेगा | आपने सराहा तो मेरा उत्साह बढ़ गया है, खुशी भी बहुत है... स्वागत है....आपका और आपके अन्य दोस्तों का, जो अबतक "विश्वगाथा" के आँगन में नहीं पहुंचे है...|
Bahot samyochit kadam uthaaya hai Pankajji. Jin rachnaaon ka pahle Hindi anuvaad n hua ho unko bhi yahaan sthaan mil sakta hai. Shubhechchhayein.
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