Posted by
Pankaj Trivedi
In:
कविता
दाग़ - पंकज त्रिवेदी
मैंने हमेशा देखा है
खुशी का लहराता दरिया
मगर
मेरे जाने के बाद उसी
आँखों से
टपकती एक एक बूँद....
अपने निशाँ छोड़ जाती है...
क्यूंकि
वह गिरने के बाद
अपने नमकीन
दाग़ छोड़ जाते हैं .... !!!
07, अगस्त, 2010
खुशी का लहराता दरिया
मगर
मेरे जाने के बाद उसी
आँखों से
टपकती एक एक बूँद....
अपने निशाँ छोड़ जाती है...
क्यूंकि
वह गिरने के बाद
अपने नमकीन
दाग़ छोड़ जाते हैं .... !!!
07, अगस्त, 2010
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