कार्य (कर्म)
- श्री वल्लभाचार्य
जीभ बड़ी, उसका कार्य छोटा | - गुजराती कहावत
- हितोपदेश
विविध विचारक
दुःख का कारण हमारी चित्तवृत्तिओं का प्रभाव ही है | - भगवान श्री कृष्ण
क्षमा असमर्थ मानवी का लक्षण और असमर्थों का आभूषण है | - वेदव्यास
मेरे जीवन में कईं कठिनाईयाँ आई है, मगर मेरे होठों को कभी
भी उसकी जानकारी नहीं थी क्यूंकि वह हमेशा हंसते ही रहते है... ! - चार्ली चेपलिन
आपकी सफलता के लिएँ कईं लोग ज़िम्मेदार होंगे मगर निष्फलता के लिएँ सिर्फ आप
ही ज़िम्मेदार है | -स्वामी विवेकानंद
ईश्वर (प्रभु, परमात्मा, खुदा...)
१ । ईश्वर निराकार है । मगर उनके गुण-कर्म-स्वभाव अनंत है । -दयानंद सरस्वती
२ । ईश्वर एक ही है, भक्ति उसे अलग-अलग रूप में वर्णन करती है | - उपनिषद्
३ । जो प्रभु कृपा में सच्चा विशवास रखता है, उसके लिएँ अनंत कृपा बहती है । - माताजी
४ । परमात्मा हमेशा दयालु है । जो शुद्ध ह्रदय से उसकी मदद मांगता है उसे वह अवश्य देता है ।
- स्वामी विवेकानंद
५ । परमात्मा की शक्ति अमर्याद है, सिर्फ हमारी श्रद्दा अल्प होती है । - महावीर स्वामी
अभिमान
१। अभिमान नरक का द्वार है |
२ । अभिमान जब नम्रता का महोरा पहन लेता है, तब ज्यादा ही घृणास्पद होता है । -कम्बरलेंद
३ । बड़े लोगों के अभिमान से छोटे लोगों की श्रद्धा बड़ा कार्य कर जाती है । - दयानंद सरस्वती
४ । जिसे खुद का अभिमान नहीं, रूप का अभिमान नहीं, लाभ का अभिमान नहीं, ज्ञान का अभिमान नहीं,
जो सर्व प्रकार के अभिमान को छोड़ चुका है, वही संत है | - महावीर स्वामी
५ । सभी महान भूलों की नींव में अहंकार ही होता है | - रस्किन
