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In:

कार्य (कर्म)


1. कर्म तो कामधेनु है, उसे दुहना आएं तो आनंदरूप दूध मिलेगा |
- श्री वल्लभाचार्य
2. रूप या जन्म गौरव के कारण नहीं बनाते, इन्सान अपने कर्म से ही शोभा बढ़ा सकता है | - पंचतंत्र
3 . जिसकी जीभ (ज़बान) छोटी, उसका कार्य बड़ा ; जिसकी
जीभ बड़ी, उसका कार्य छोटा | - गुजराती कहावत
4 . कर्म का ध्वनी शब्द से भी ऊंचा है | - जापानी कहावत
5 . कर्म के स्वरूप का विचार करने से नम्रता आती है और धर्म का विचार करने से निर्भयता आती है |
- हितोपदेश

In:

विविध विचारक

दुःख का कारण हमारी चित्तवृत्तिओं का प्रभाव ही है | - भगवान श्री कृष्ण

क्षमा असमर्थ मानवी का लक्षण और असमर्थों का आभूषण है | - वेदव्यास

मेरे जीवन में कईं कठिनाईयाँ आई है, मगर मेरे होठों को कभी
भी उसकी जानकारी नहीं थी क्यूंकि वह हमेशा हंसते ही रहते है... ! - चार्ली चेपलिन

आपकी सफलता के लिएँ कईं लोग ज़िम्मेदार होंगे मगर निष्फलता के लिएँ सिर्फ आप
ही ज़िम्मेदार है | -स्वामी विवेकानंद

In:

ईश्वर (प्रभु, परमात्मा, खुदा...)

१ । ईश्वर निराकार है । मगर उनके गुण-कर्म-स्वभाव अनंत है । -दयानंद सरस्वती
२ । ईश्वर एक ही है, भक्ति उसे अलग-अलग रूप में वर्णन करती है | - उपनिषद्
३ । जो प्रभु कृपा में सच्चा विशवास रखता है, उसके लिएँ अनंत कृपा बहती है । - माताजी
४ । परमात्मा हमेशा दयालु है । जो शुद्ध ह्रदय से उसकी मदद मांगता है उसे वह अवश्य देता है ।
-
स्वामी विवेकानंद
५ । परमात्मा की शक्ति अमर्याद है, सिर्फ हमारी श्रद्दा अल्प होती है । - महावीर स्वामी

In:

अभिमान

१। अभिमान नरक का द्वार है |
२ । अभिमान जब नम्रता का महोरा पहन लेता है, तब ज्यादा ही घृणास्पद होता है । -कम्बरलेंद
३ । बड़े लोगों के अभिमान से छोटे लोगों की श्रद्धा बड़ा कार्य कर जाती है । - दयानंद सरस्वती
४ । जिसे खुद का अभिमान नहीं, रूप का अभिमान नहीं, लाभ का अभिमान नहीं, ज्ञान का अभिमान नहीं,
जो सर्व प्रकार के अभिमान को छोड़ चुका है, वही संत है | - महावीर स्वामी
५ । सभी महान भूलों की नींव में अहंकार ही होता है | - रस्किन