छोटी सी बात
आज तुम्हारी
एक छोटी सी बात ने मुझे
ईस तरह विचलित कर दिया कि
मेरे पास कहने को कुछ नहीं !
तुम्हारे ईन शब्दों के कारण
मेरा दिल कितना दु:खी हो गया...
शायद तुम सही अर्थ में
मुझे जान नहीं पाई हो.. !!
* * *
मेरे दिल ने कहा, मुझे ही --
"क्यूं प्यार करते हो इंसानियत से...
मैंने तुम्हारे शरीर में
स्थान लिया, वही मेरा अपराध?
मेरे कारण तुम्हें क्या नहीं मिला?
तुम्हारे पास संवेदना है, भावनाओं का स्फूट है,
अभिव्यक्ति है, शब्द है, दृष्टी है, ज्ञान है,
आकांक्षा है, ईच्छा है, लड़ने की ताकत है -
यह सब मेरे कारण तो है...
सोचो जरा... अगर मैं नहीं तो तुम कौन हो?"
* * *
अब मैं अपने दिल को क्या जवाब दूं ?
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10 comments:
सोचो जरा... अगर मैं नहीं तो तुम कौन हो?
अब मैं अपने दिल को क्या जवाब दूं ? ...वाह जी ,,,बहुत खूब ....!!!!!!!!!!!!
बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।
vary good janab,
aapne achhe se kaha apni bat ko/ dil ki jubani
badhai
Nice one.
bahut sundar rachnaa...dhanyvaad is rachnaa tak ham tak pahuchane ke liye..us dil ke ham par bahut ahsaan hai...uski takat ko samjhnaa hoga jo anvirat hamare liye kaam karta hai... Jay ho..
aik baat aur mera FB account band ho gaya hai aur blog kaa email bhi kaam nahi kar raha hai..
bahut sundar.....
क्यूं प्यार करते हो इंसानियत से...
मैंने तुम्हारे शरीर में
स्थान लिया, वही मेरा अपराध?....
वाह!! बहुत ही बेहतरीन रचना.. सच मे दिल की रचना दिल को छू गई ..और अगर ये ना होता, संवेदनाये कहाँ से आती ..सच ..सादर..
ट्रावेल ट्रेड,वंदनाजी, आलोकजी, अजीतसिंहजी, डॉ. नूतन, सोम्या और रेणु,
आप सब का धन्यवाद | आप कुछ नया लिखे तो "विश्वगाथा पर "अतिथि" के लिएँ रचना भेज सकते हैं |
सुंदर भावाव्यक्ति......
प्रतिभाजी, धन्यवाद
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