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Pankaj Trivedi
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अतिथि-कविता
सौरभ पाण्डेय की कविता
उमसी-दशा
राहत पीपल पत्ती...
मन तक चढ़ आयी दुपहरिया
गेंदा-बेला गुमसे
घिर आये बन बूँदें ये असमंजस कैसे-कैसे
और चढ़ी सिर लगी बसाने
नख हलचल की बस्ती..।
राहत पीपल पत्ती.. ॥
तन-तन उगी करौंदा-झाड़ी
करती अनमन कोठ*
नज़रें तब्भी रहीं निकोतीं
अमिया-अमिया होंठ पिछवाड़े छाहीं* में रह-रह
भीगी गाँठ सुलगती.. ।
राहत पीपल पत्ती..॥
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11 Comments
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11 comments:
विजयादशमी के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!
सौरभ जी की कविता पीपल पे सुन्दर .. विजयदशमी पर शुभकामनाएं ..
फेसबुक की हेकिंग से विश्वास सा उठ गया है सो यहाँ पर पूछ रही हूँ पंकज जी आपकी तीन प्रोफाइल दिख रही है.. किस पर यकीन करे.. एक पर फूल . दो पर आपकी तस्वीर ..आप इस टिपण्णी को मिटा देंगे क्यूंकि ये कविता के सन्दर्भ में नहीं है....
नूतनजी,
आपकी बात सही है | अब मैंने "कमल का फूल" रखा है | पासवर्ड और मेल भी बदल दिया है... आप निश्चिन्त रहकर "कमल के फूल" को मेरी वाल समजिये |
आपकी कवितायेँ आज रखनी थी, मगर आपकी फोटो नहीं थी | मेल एड्रेस पर भेज दें... अगर ये टिप्पणी रही तो भी ठीक है, दुसरे दोस्तों को जानकारी मिलेगी | धन्यवाद |
trivedipankaj1008@gmail.com
.आप ऐसे ही लिखते रहें ईश्वर से प्रार्थना करूँगा...शुभकामनाओं सहित..आपका मित्र और सुभेक्षक..
नवरात्रि और विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ..
.."जय श्री राम".."जय माता दी"..
सुंदर प्रस्तुति...दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं।
sundar kavita!
regards,
sundar prastuti...
विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ..
आप समस्त शुभेच्छु पाठकों को मेरा नमन
प्रस्तुत रचना यों विजया से संबन्धित नहीं किन्तु प्रकाशित हूई इसी अवसर पर..
एक अनुरोध:
पंक्ति "पिछवाड़े छाहीं में रह-रह भीगी गाँठ सुलगती.." को अलग या नई पंक्ति की तरह पढ़ा जाय.
दूसरे,तारांकित शब्दों के अर्थ -
कोठ - दाँतों की खट्टा खाने के उपरान्त ऐसी अवस्था जब कुछ काटना कष्टकर हो जाय
छाहीं - छाँव, पेड़-पौधों का झुरमुट
सौरभ जी विजयादशमी की शुभकामनाएँ आप को ...और सुंदर रचना के लिये आप को बधाई !!!!!!निर्मल पानेरी !!
आदरणीय सौरभजी की रचना के कारण हमारा "विश्वगाथा" का आँगन हराभरा हुआ है | मैं उनका तहे दिल से आभारी हूँ और आप सब पाठकों का, जिन्होंने हमेशा मुझे स्नेह दिया | धन्यवाद |
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