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Pankaj Trivedi
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संवाद
दो कलमें
"विश्वगाथा" पर आपको एक साथ बहुत ही जानी पहचानी दो कलम से रूह-ब-रूह करवाएंगे. एक - जो स्त्री के अस्तित्त्व को अलग अंदाज़ में आपके सामने रखकर कहेगी -"व्यर्थ नहीं मैं" |
दूसरे - जो हमारे धर्मग्रंथों के आधार पर "कलियुग" के विविध पहलू पर अभिव्यक्त होंगे...|
"विश्वगाथा" पर प्रत्येक रविवार और बृहस्पतिवार को हम "अतिथि" में विविध रचनाकारों को आपके लिएँ ख़ास बुलाते हैं | उम्मींद है, इस बार भी अओअको पसंद आयेगी...
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3 comments:
dono kalamon se bahti shabdsarita ka intzaar rahega!
regards,
sudar prayas...........
Badhiya..hum pathko ki to chandi hi chandi hai fir.
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