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Pankaj Trivedi
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गीत
क्या नखरें करती हैं मेरे बाप !
पड़ोसी के घर आई है एक लड़की
लगती वो स्मार्ट है, चलती वो फास्ट है
क्या नखरें करती हैं मेरे बाप !
बोबकट बाल है, उसमें गुलाब है
मीनी स्कर्ट और टी-शर्ट कमाल है
सेंडल और पर्स है, खुद बेमिसाल है
नुक्कड़ पे आहें भरते जवान है
क्या नखरें करती हैं मेरे बाप !
सुबह-शाम निकले वो चक्कर लगाने
रात को खेलती है वो गरबा के फेरें
जवान हो या बूढ़े, देखें तो ज़रा चहरें
ऊपर से भरते हैं वो, आहें कमाल की
क्या नखरें करती हैं मेरे बाप !
कल तो जायेगी वो, सूने होंगे सबके मन
यादों को छोड़कर अपना बनाने का छल
करते थे मस्ती और छेड़छाड़ जवान सब
क्या नखरें करती हैं मेरे बाप !
पड़ोसी के घर आई है एक लड़की
मानों नींद भी उड़ गई है सबकी
पड़ोसी के घर आई है एक लड़की
मानों नींद भी उड़ गई है सबकी
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12 comments:
pankaj bhai norata man aa shun?????????????
hahahaahahahahahaa
beautifully panned a beautiful girl
jhum baraabar, jhum baraabar, jhum baraabar, jhuuuuuuuuuuuuuum..
kya baat hai...bahaar hi bahaar hai...bahut sundar shabd chitra..aabhar.
नविनजी,
आपकी बात सही है, मगर नवरात्री में ये शरारत भरी कविता का अर्थ गलत नहीं लेते | इसे कविता ही समजिये मेरे भाई !
दूसरी बात यह है की आज के ज़माने में सच्ची श्रद्धा और भक्ति गरबा गाने वाले- खास तो पार्टी प्लाट या क्लब में है? उस सन्दर्भ में इसे व्यंग्य काव्य भी कह सकते हैं |
bahut khub rachanaa hai
nirali hai..kavita yaa pados me aayi.... :))
bhai saab prnam ,
bilkol naye andaz me aap ka roop dikha , badhai , ek manchiy kavita hai , jis ka aap opyog bakhubi kar saktte hai ,aanand aa gaya !
saadar
पंकज जी ...आज के परिपेक्ष्य में शब्दों का अच्छा मेल गुदगुदाते हुई आप की कवीता ....धन्यवाद Nirmal Paneri
Masti hi masti hai..samprat paristhiti ne supere vyakt karti rachna.
दोस्तों,
आप सब ने मेरे स्वभाव से विरुद्ध एक रोमेंटिक कविता को सिर्फ कविता के रूप में ही देखकर स्वीकार किया, उअकसे लिएँ आभारी हूँ | आज के दौर में जो सामाजिक बदलाव है, उसी का आयना होती है कविता... धन्यवाद ईसलिएन कि आपने अलग मूड को भी परखा और सराहा |
कल तो जायेगी वो, सूने होंगे सबके मन
यादों को छोड़कर अपना बनाने का छल
करते थे मस्ती और छेड़छाड़ जवान सब
अरे कैसे झेल पायेंगे बूढ़े और जवान ग़म
क्या नखरें करती हैं मेरे बाप !
आधुनिकता और सभी उम्र के लोगों को
साथ लेकर लिखी गई एक सुन्दर रचना है I
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