आज का दिन.... उदास बीता...
स्वागत है आपका...
'विश्वगाथा' के सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार |
हमने 1-सितम्बर (जन्माष्टमी) को ही ब्लॉग शुरू किया और पत्रिका का स्वरूप तो डेढ़ महिने से ही ! आप सबके स्नेह की बदौलत आज सिर्फ 2 -महिने में ही 'विश्वगाथा' ने अपनी अलग छवि बनाई है | आप लोगों का साथ न होता तो ये संभव नहीं होता| मैं आप सबका आभारी हूँ |
अभी तक हमने साहित्य-संस्कृति-इतिहास-परम्परा और अन्य विधाओं को सम्मिलित करने की कोशिश की है | हमारे देश के मानव जीवन में कईं रंग भरे हैं | कईं धर्म और रीति-रिवाज भी है | धर्म, पर्व और मेले हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है | अन्य भाषाओं के अनुवाद से हमारी एकता और वैचारिक क्षमता भी बढ़ेगी | संकुचितता की कोठारी से निकालकर हम खुली हवा में जी सकेंगे | बुराईयों के बीच भी अच्छाई है | हमें उसे संभालकर जीना है और आनेवाली नस्ल को उम्दा विरासत भी देनी है |
मैं चाहूँगा कि आप भी ज्यादा से ज्यादा दोस्तों को इस मंच पर ले आएं | प्रस्थापित और नए रचनाकारों ने 'विश्वगाथा' को अपना ही समझकर सहयोग दिया है | मेरे साथ मेरे प्रिय - श्री नरेन्द्र व्यासजी और सम्माननीया जया केतकी जी का अमूल्य योगदान रहा है |
अतिथि
दो कलमें
डॉ. नूतन
अतिथि

"विश्वगाथा" पर कल के अतिथि कौन होंगे? यूं तो वह जानेमाने शायर, कहानीकार, लघुकथाकार और आलोचक भी हैं | गझल के क्षेत्र में उनका कार्य ही उनकी ऊंचाई सिद्ध करता है | बहुत ही लोकप्रिय और सुप्रसिद्ध साईट पर प्रधान सम्पादक होना ही उनकी काबिलियत का दस्तावेज है | नेकदिल और शेरदिल इंसान के रूप में उनका कोइ जवाब नहीं | "विश्वगाथा" के पाठकों के लिएँ यह एक उपहार ही होगा | रविवार की सुबह तक का इंतज़ार आपको बाद में पूर्ण आनंदयात्रा कराएगा |
आज के अतिथि कौन ?
"विश्वगाथा" पर आज हमारे लिएँ ख़ास "अतिथि" जो है वह पेशे से कॉपीरायटर तथा विज्ञापन व ब्रांड सलाहकार | दिल्ली और एन.सी.आर. की कई विज्ञापन एजेंसियों के लिए और कई नामी गिरामी ब्रांडो के साथ काम करने के बाद स्वयं की विज्ञापन एजेंसी तथा डिजाईन स्टूडियो - ज्योतिपर्व का सञ्चालन. अपने देश, समाज व लोगों से सरोकार को बनाये रखने के लिए कविता को माध्यम बनाने वाले जानेमाने कवि |
उनकी कविताओं में खासियत यह है कि वर्त्तमान घटनाओं के साथ प्रयोगशील कविताओं पर भी अपनी परिकल्पना के चित्र कलम के द्वार बखूबी बनाने की क्षमता रखते हैं | कुछ ही देर में आपके सामने होगी यह कवितायेँ.... "विश्वगाथा" पर...
अतिथि
आवश्यक जानकारी
दोस्तों,
मेरे हाथ में कुछ दिनों से दर्द है | मैं जयादा टाईप नहीं कर पाता | आप सभी से गुज़ारिश है कि चाहकर भी मैं ज्यादा कमेन्ट नहीं दे पाता | चेट करना भी मुश्किल है | आप चाहें तो मुझे मेसेज कर दें, मैं जितना जल्दी होगा, प्रत्युत्तर दूंगा | अन्यथा न लेकर सहयोग देंगे... धन्यवाद |
Mobile : 096625 14007
नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की..... जयश्री कृष्ण |
मेरे प्रिय दोस्तों,
मैंने आप सबसे "जन्माष्टमी की पूर्व संध्या" पर कहा था कि एक सरप्राईझ दूंगा |
दोस्तों, भगवान कृष्ण के जन्मदिन पर उनके पावन चरणों में मेरा समग्र सृजन समर्पित करने के लिएँ मेरा पहला ब्लॉग "विश्वगाथा" शुरू कर रहा हूँ | जिसमें आपको साहित्य की सभी विधाओं पर मेरा सर्जन पढ़ने का अवसर मिलेगा | कईं दोस्तों ने बार-बार आग्रह किया था कि अपना ब्लॉग शुरू करें | मगर सत्कार्य का भी एक समय होता है ! आज वह पावनकारी दिन है, जिस दिन युगपुरुष श्री कृष्ण भगवान का जन्म हुआ था |
मेरे सभी दोस्तों ने प्यार की बरसात से मुझे हमेशा तरोताज़ा रखा है | उन सभी नामी-अनामी दोस्तों का भी शुक्रगुजार हूँ | यह ब्लॉग में जो भी प्रकाशित होगा, उन विचारों का कोपीराईट "विश्वगाथा" का होगा | इसमें से कुछ भी लेने से पहले सम्मति लेनी अनिवार्य ही है |
ब्लॉग को बनाने में श्री नरेन्द्र व्यास का अमूल्य योगदान है | साथ ही जया (केतकी) शर्मा, कुसुम ठाकुर, रश्मि प्रभा, डॉ. नूतन के साथ आप सभी का स्नेह भी तो था |
साथ ही आप सबकी और से मेरी रचनाओं पर अमूल्य टिप्पणी भी मिलेगी तो मैं समझूंगा की मैं कुछ करेने योग्य हूँ | आपके स्नेह और सलाह का हमेशा ख्याल रखूंगा |
- पंकज त्रिवेदी






