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आज का दिन.... उदास बीता...


आज का दिन.... उदास बीता...
21, फरवरी 1993 को बाबूजी नहीं रहे थे... गुजराती साहित्य में वो भी कविताएँ लिखते थे | गांधी विचार धारा पर अंतिम साँस ली थी | जीवन पर्यंत खादी पहनने का वचन निभाया और अंतिम यात्रा में भी खादी का ही कफ़न ! अपने ही बाबूजी के लिए मैं क्या कहूं ?

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स्वागत है आपका...

'विश्वगाथा' के सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार |
हमने 1-सितम्बर (जन्माष्टमी) को ही ब्लॉग शुरू किया और पत्रिका का स्वरूप तो डेढ़ महिने से ही ! आप सबके स्नेह की दौलत आज सिर्फ 2 -महिने में ही 'विश्वगाथा' ने अपनी अलग छवि बनाई है | आप लोगों का साथ न होता तो ये संभव नहीं होता| मैं आप सबका आभारी हूँ |

अभी तक हमने साहित्य-संस्कृति-इतिहास-परम्परा और अन्य विधाओं को सम्मिलित करने की कोशिश की है | हमारे देश के मानव जीवन में कईं रंग भरे हैं | कईं धर्म और रीति-रिवाज भी है | धर्म, पर्व और मेले हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है | अन्य भाषाओं के अनुवाद से हमारी एकता और वैचारिक क्षमता भी बढ़ेगी | संकुचितता की कोठारी से निकालकर हम खुली हवा में जी सकेंगे | बुराईयों के बीच भी अच्छाई है | हमें उसे संभालकर जीना है और आनेवाली नस्ल को उम्दा विरासत भी देनी है |

मैं चाहूँगा कि आप भी ज्यादा से ज्यादा दोस्तों को इस मंच पर ले आएं | प्रस्थापि और नए रचनाकारों ने 'विश्वगाथा' को अपना ही समझकर सहयोग दिया है | मेरे साथ मेरे प्रिय - श्री नरेन्द्र व्यासजी और सम्माननीया जया केतकी जी का अमूल्य योगदान रहा है |

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अतिथि


"विश्वगाथा" पर कल आपको दो-कविताएँ मिलेंगी जिनमे एक कवयित्री-लेखिका और पत्रकार की कलम से चित्रात्मकता और संवेदनात्मकता का अहसास मिलेगा तो दूसरी ऐसी शख्सियत है जिन्होंने हाल ही में कलम उठाई है फिर भी उनकी कलम की धार बहुत पैनी और परिपक्व है और सीधे-सरल अंदाज़ में अपनी अभिव्यक्ति की गहराइयों तक ले जाती हैं. जरूर पढियेगा...आपको निराशा नहीं होगी.

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दो कलमें


"विश्वगाथा" पर आपको एक साथ बहुत ही जानी पहचानी दो कलम से रूह-ब-रूह करवाएंगे. एक - जो स्त्री के अस्तित्त्व को अलग अंदाज़ में आपके सामने रखकर कहेगी -"व्यर्थ नहीं मैं" |
दूसरे - जो हमारे धर्मग्रंथों के आधार पर "कलियुग" के विविध पहलू पर अभिव्यक्त होंगे...|
"विश्वगाथा" पर प्रत्येक रविवार और बृहस्पतिवार को हम "अतिथि" में विविध रचनाकारों को आपके लिएँ ख़ास बुलाते हैं | उम्मींद है, इस बार भी अओअको पसंद आयेगी...

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डॉ. नूतन



"विश्वगाथा" पर कुछ टेकनिकल कारण से डॉ. नूतनजी की कविता नहीं रख पाए... अब रविवार को "अतिथि" में रखेंगे... बड़ा संकोच और शर्मिंदगी के साथ आशा करता हूँ कि सभी पाठक गण इस बात को समज पाएँगे... - पंकज त्रिवेदी

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अतिथि


"विश्वगाथा" पर कल के अतिथि कौन होंगे? यूं तो वह जानेमाने शायर, कहानीकार, लघुकथाकार और आलोचक भी हैं | गझल के क्षेत्र में उनका कार्य ही उनकी ऊंचाई सिद्ध करता है | बहुत ही लोकप्रिय और सुप्रसिद्ध साईट पर प्रधान सम्पादक होना ही उनकी काबिलियत का दस्तावेज है | नेकदिल और शेरदिल इंसान के रूप में उनका कोइ जवाब नहीं | "विश्वगाथा" के पाठकों के लिएँ यह एक उपहार ही होगा | रविवार की सुबह तक का इंतज़ार आपको बाद में पूर्ण आनंदयात्रा कराएगा |

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आज के अतिथि कौन ?


"विश्वगाथा" पर आज हमारे लिएँ ख़ास "अतिथि" जो है वह पेशे से कॉपीरायटर तथा विज्ञापन व ब्रांड सलाहकार | दिल्ली और एन.सी.आर. की कई विज्ञापन एजेंसियों के लिए और कई नामी गिरामी ब्रांडो के साथ काम करने के बाद स्वयं की विज्ञापन एजेंसी तथा डिजाईन स्टूडियो - ज्योतिपर्व का सञ्चालन. अपने देश, समाज व लोगों से सरोकार को बनाये रखने के लिए कविता को माध्यम बनाने वाले जानेमाने कवि |

उनकी कविताओं में खासियत यह है कि वर्त्तमान घटनाओं के साथ प्रयोगशील कविताओं पर भी अपनी परिकल्पना के चित्र कलम के द्वार बखूबी बनाने की क्षमता रखते हैं | कुछ ही देर में आपके सामने होगी यह कवितायेँ.... "विश्वगाथा" पर...

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अतिथि


स्वागत !

"विश्वगाथा" के आँगन में पिछले रविवार को हमने अपनी अलग अलग विधाओं में आप सब के लिएँ किसी एक "अतिथि" के अंतर्गत ब्लॉग की दुनिया की जानीमानी कवयित्री रश्मि प्रभा की कविता प्रस्तुत की थी |
इस बार भी हम ऐसी ही एक सशक्त कवयित्री को प्रस्तुत कर रहे हैं | जिन्हें आप जानते ही हैं | अपना एक काव्य संग्रह देने वाली यह कवयित्री जानती है कि जल्दी पुस्तक देने से अच्छा हो कि उच्च स्तरीय रचनाएं लिखने का आनंद लेना और कविता भावकों के ह्रदय में स्थान पाना ही बड़ा सौभाग्य होता है |
मैं जानता हूँ, आप सब को इंतजार रहेगा कल यानी रविवार की सुबह का... जो एक सक्षम कवयित्री के कलम से अद्भुत कविता से हम सब को प्रसन्न कर देगी और कुछ सीख भी ... | - पंकज त्रिवेदी

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आवश्यक जानकारी

दोस्तों,
मेरे हाथ में कुछ दिनों से दर्द है | मैं जयादा टाईप नहीं कर पाता | आप सभी से गुज़ारिश है कि चाहकर भी मैं ज्यादा कमेन्ट नहीं दे पाता | चेट करना भी मुश्किल है | आप चाहें तो मुझे मेसेज कर दें, मैं जितना जल्दी होगा, प्रत्युत्तर दूंगा | अन्यथा लेकर सहयोग देंगे... धन्यवाद |

Mobile : 096625 14007

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नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की..... जयश्री कृष्ण |


मेरे प्रिय दोस्तों,
मैंने आप सबसे "जन्माष्टमी की पूर्व संध्या" पर कहा था कि एक सरप्राईझ दूंगा |
दोस्तों, भगवान कृष्ण के जन्मदिन पर उनके पावन चरणों में मेरा समग्र सृजन समर्पित करने के लिएँ मेरा पहला ब्लॉग "विश्वगाथा" शुरू कर रहा हूँ | जिसमें आपको साहित्य की सभी विधाओं पर मेरा सर्जन पढ़ने का अवसर मिलेगा | कईं दोस्तों ने बार-बार आग्रह किया था कि अपना ब्लॉग शुरू करें | मगर सत्कार्य का भी एक समय होता है ! आज वह पावनकारी दिन है, जिस दिन युगपुरुष श्री कृष्ण भगवान का जन्म हुआ था |
मेरे सभी दोस्तों ने प्यार की बरसात से मुझे हमेशा तरोताज़ा रखा है | उन सभी नामी-अनामी दोस्तों का भी शुक्रगुजार हूँ | यह ब्लॉग में जो भी प्रकाशित होगा, उन विचारों का कोपीराईट "विश्वगाथा" का होगा | इसमें से कुछ भी लेने से पहले सम्मति लेनी अनिवार्य ही है |
ब्लॉग को बनाने में श्री नरेन्द्र व्यास का अमूल्य योगदान है | साथ ही जया (केतकी) शर्मा, कुसुम ठाकुर, रश्मि प्रभा, डॉ. नूतन के साथ आप सभी का स्नेह भी तो था |

साथ ही आप सबकी और से मेरी रचनाओं पर अमूल्य टिप्पणी भी मिलेगी तो मैं समझूंगा की मैं कुछ करेने योग्य हूँ | आपके स्नेह और सलाह का हमेशा ख्याल रखूंगा |

- पंकज त्रिवेदी