नाम नहीं...!
तुम्हारे चेहरे को मैं यहाँ से पढ़ सकता हूँ
तुमको मैंने दोस्त कहा
यानि हम समान है...
उम्र और विचार से भी हम समान- दोस्त हैं
तुम्हे मेरे लिए सम्मान है तो मुझे भी
हम एकदूजे को समझते है हम
जब दोस्त बनाया तो not good, not bad
क्यूंकि- प्रत्येक इंसान चाहता है....
पूरे परिवार के बावजूद... कोई ऐसा हो,
जिसे हम सबकुछ कह सके खुले मन से
ये मानव स्वभाव है...
कोई इससे परे नहीं
अब तुम कहो, मै गलत हूँ ?
एहसासों के इस रिश्ते को मैंने भी स्वीकार किया है
जानता हूँ कि हम दोनों किसी ऐसी डगर पर आये हैं,
जहाँ पहुँचने हमारा मन भी चाहता था....
जो सबकुछ मिलकर भी अधूरा था
शायद वही सबकुछ हम एकदूजे से पा रहे हैं
हाँ शायद ऐसा ही है
इस संबंध का नाम नहीं, शरीर नहीं, मौजूदगी भी नहीं -
फिर भी यह सब है हम दोनों के साथ...
ईन सब के साथ ही हम मिलते है
और यही अहसास हमारे दिल को - मन को अच्छा लगता है...
तुम्हारे पास सबकुछ है, फिर भी मेरी जगह भी है...
अलग...
शायद तुम भी इसी तरह मेरे अंदर हो...
तुम मुझसे जुदा नहीं हो... कही भी...
शायद धड़कने लगी हो मेरे साथ.....
सच कितना अच्छा लगता है.....
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17 comments:
जब दोस्त बनाया तो not good, not bad
क्यूंकि- प्रत्येक इंसान चाहता है....
पूरे परिवार के बावजूद... कोई ऐसा हो,
जिसे हम सबकुछ कह सके खुले मन से
bahut sahi... ek dost , wah apni niji dairy hi kyun na ho
आप बिलकुल गलत नहीं है ...
बहुत सच्चे हैं ये एहसास ...!
एहसासों के इस रिश्ते को मैंने भी स्वीकार किया है
बहुत सुंदर रचना पंकज .... दिल के एहसासों को दिल तक पहुंचाती....ये ऐसे भाव हैं पंकज जिन्हें हम कभी न कभी अपने जीवन में किसी के लिए महसूस करते हैं...मगर इसे इतनी सच्चाई से कह नहीं पाते ! बहुत खूब...! :)
दोस्ती और कुछ नहीं //....
एक नई परिभाषा की खोज की ओर अग्रसर
शायद धड़कने लगी हो मेरे साथ....
Sach hai!
Pankaj ji
शायद तुम भी इसी तरह मेरे अंदर हो...
तुम मुझसे जुदा नहीं हो... कही भी...
शायद धड़कने लगी हो मेरे साथ.....
सच कितना अच्छा लगता है.....
सच्चे एहसास. जो हर इन्सान के अंदर होते हैं पर इतनी बेबाकी से समझ और कह नहीं पाते. सुंदर इकरार.
दुनियाँ जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है ..
मिल जाये तो माटी है,खो जाए तो सोना है....
(अज्ञात )
दोस्ती के अहसासों की सुन्दर रचना।
प्रेम की गहन संवेदना से भरी कविता.. ह्रदय को छू गई..
भाई साब ,
प्रणाम !
''प्रेम अभिव्यक्त नहीं होता अहसास किया जाता है , रिश्ते सोच के नहीं स्वतः ही बन जाते है ''
सुन्दे अभिव्यक्ति के लिए साधुवाद .
सादर !
बहुत बढ़िया रचना....आभार पंकज जी
बहुत गहरे अहसास..आभार
मित्रता से जुडी कुछ अहसासों का बेबाकी और बारीकी से इकरार ..सुन्दर रचना
यही एक सम्वेदना ही तो है जो हमार अन्दर एक विशेष विश्वास जगाता है, एक स्थान बनाता है जिससे दिल की अच्छी बुरी, सही गलत, सुख दुःख बाँट सकें इ जब ये विश्वास पूर्ण रूप से हो जाता है तो हम कौन और आप कौन यह सब दूर हो जता है बस रह जाता है जीवन के मधुर पल I
I am wholeheartedly delighted with your esteemed friendship.Lets develop more and more confidence with each other to cherish our this relation lasting long. We must share our sorrows, happiness, views likings and dislikings and be ever ready in need of others. I am open to share. You are too most welcome. Thanks.
और यही अहसास हमारे दिल को - मन को अच्छा लगता है...
तुम्हारे पास सबकुछ है, फिर भी मेरी जगह भी है...
अलग...
शायद तुम भी इसी तरह मेरे अंदर हो...
तुम मुझसे जुदा नहीं हो... कही भी...
शायद धड़कने लगी हो मेरे साथ.....
सच कितना अच्छा लगता है.....
दिल को छू लेने वाली रचना
पंकज जी बहुत ही सुंदर रचना के लिए धन्यवाद
sach me Pankaj ji..dosti ka rishta hi shayad aisa rishta hai jo humpe thopa nhi jata ..balki ye humari dil ki gehrayion se ubhar ke aata hai....dhanyavaad is sunder ehsaas ko shabdo ka roop dene ke liye
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