दीपोत्सव महोत्सव
आज के दौर में समाज में हमें निराशा, भय-आतंक और दगाबाज़ीने घेरा है | ऐसे मैं "विश्वगाथा" परिवार आपके लिएँ साहित्य-संस्कृति और आध्यात्मिकता से जुड़े विचारों का छोटा सा दीप लेकर खडा है | चारों तरफ भले ही अंधकार का साम्राज्य हो, मगर जहां अपने शुद्ध विचार और शुद्ध आत्मा का दीप जलता हो वहां दुःख-दर्द, निराशा या भय की कालिमा दूर हो जायेगी | मैं आप सबको आहवान करता हूँ कि इस छोटे से दीप को बुझाने न दें | आप भी हमारे साथ इसमें श्रद्धा और भक्ति से इसे बचाए रखेंगे तो छोटा सा दीप एक-न-एक दिन सूर्य बन जाएगा |आप सभी को दीपावली के इस पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ! महालक्ष्मी आप पर सदा मे
हरबान रहे | आप और आपका परिवार सुखी हो, मंगलमय हों, ऐसी श्रीगणेश जी, प्रभु श्री हरि और माँ लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं | दीपावली महोत्सव को धूमधाम से मनाने के प्रयोजनार्थ आप सभी के लिए प्रस्तुत है | हम सब मिलकर आस्था और विश्वास के दीपक जलाएँ और अपने सुखों की रंग-बिरंगी फुलझडियाँ मिलजुलकर बाँटें और दुखों को प्रेम की चिंगारी से पटाखों के धुएं में उड़ा दें...
- पंकज त्रिवेदी
"आराधना " - कुसुम ठाकुर
माँ कैसे करूँ आराधना ,कैसे मैं ध्यान लगाऊँ ।
द्वार तिहारे आकर मैया ,कैसे मैं शीश झुकाऊँ ।
मन में मेरे पाप का डेरा ,माँ कैसे उसे निकालूं ।
न मैं जानूं आरती बंधन ,माँ कैसे तुम्हें सुनाऊँ ।
बीता जीवन अंहकार में ,याद न आयी तुम माँ ।
अब तो डूब रही पतवार ,माँ कैसे पार उतारूँ ।
कर्म ही पूजा रटते रटते ,माँ बीता जीवन सारा ।
पर तन भी अब साथ न देवे ,माँ, अर्चना करूँ मैं कैसे ।
मैं तो बस इतना ही जानूँ ,माँ, तू सब की सुधि लेती ।
एक बार ध्यान जो धर ले ,माँ दौड़ी उस तक आती ।
नन्हा सा दीया हूँ ....
मैं नन्हा सा
माटी का दीया हूँ |
अंधेरों से लड़ता
निडर जलता रहता हूँ |
हृदय को घेरे
स्वार्थ,
ईर्ष्या,
द्वेष के अँधेरे कोनों को
जागृत करता रहता हूँ |
मैं नन्हा सा
माटी का दीया हूँ |
जहाँ भी जला दो
रौशनी के गीत गाता रहता हूँ |
प्रेम,
अनुराग,
स्नेह की
रौशनी लुटाता,
निस्वार्थ जलता मिटता रहता हूँ | - सुधा ओम ढींगरा
नार्थ कैरोलीना (यू . ए .ए )
दीपावली...
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दीपों की कतारों संग
खुशियों का अम्बार सजे,
जगमग रौशनी संग
दिल की ख्वाहिश आबाद रहे !
जिन ज़हीन लम्हों को भूल आये
आज उन्हें याद करें,
दीये की लौ की तरह
प्रेम का ज्योत जलाएं !
दीप प्रज्वलित कर दिल की
दुनिया गुलज़ार करें,
अमावस्या में पूर्णिमा की
बरसात करें !
आओ इस दिवाली में
प्रेम प्रतिज्ञा कर,
परिपूर्ण जीवन का
प्रारंभ करें !
- जेन्नी शबनम
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5 comments:
पर्व-त्यौहार जीवन में उत्साह-उमंग भरते हैं। सौहार्द्र का प्रकाश,अंतस् के कलुष को हरकर आपके जीवन में सरसता घोले,ऐसी कामना है।
अच्छे संदेश!
सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!
-समीर लाल 'समीर'
दीपावली पर इन सुन्दर सुन्दर कविता रुपी दीपो से विश्व्गाथा सुसज्जित किया ..सुन्दर और अच्छा सन्देश... दीपावली पर शुभकामनायें..
पंकज भाई,
आपका बहुत बहुत शुक्रिया| आपको सपरिवार और विश्वगाथा परिवार को दीपावली की मंगलकामनाएं|
sundar rachnaon ka samayojan!
deepotsav ki haardik mangalkamnayen!!!!
regards,
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