स्मृति की एक कविता
यादें और हकीकत
उदास शाम के किनारों पर
यादों की रुनझुन करती
पायलें खनक रही हैं
थिरकती हुई यादों को
देख मन को उदासी
के सायों ने घेर लिया है..
यादों की आँखों में हैरानी के साए हैं
हैरान आँखों से वो पूछती है
में तो यहाँ हूँ,खुश हूँ, थिरक रही हूँ
तुम्हारी आँखों में तलाश फिर ये किसकी है?
उदास सी राहों पर ये सवालों की कतार क्यूँ लगी हैं
मन बोला , री नादान…!
ये तलाश है उन हकीकतों की
जिनसे तू वजूद में आई
उन आषीशी हाथों की
जो अपनी नर्म छाँव से सदा मुझे ढके रहे
वो हाथ जो मेरी ऊँगली थाम मुझे
जीवन की राहों पर चलना सिखाते रहे
जिनकी आँखें अपने जीवन से अधिक मेरे जीवन को आतुर थी
सुरक्षा का वो घेरा आज न जाने कहाँ चला गया
तू तो वजूद में आ गयी मगर वो खो गया
तभी , बस ठीक तभी
आँखों में दो आंसू भर गए हैं
शायद परमात्मा के दूत हैं ....समझाने आये हैं
हकीकतों से यादों के वजूद होते हैं
यादों से हकीकतें नहीं बना करतीं....
मत ढूंढ उन हकीकतों को
जो रेत सी फिसल कर वक़्त की धारा में जा मिली हैं
हाथ थाम ले उन यादों का
और एहसासों की पगडण्डी पर
अपना जीवन सफ़र फिर शुरू कर
और मैं फिर यादों की थिरकन को देखने लगती हूँ
खामोश सी ...कुछ स्तब्ध सी...!
This entry was posted on 7:03 PM and is filed under अतिथि-कविता . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.
18 comments:
जीवन की पायल चाहे कितनी भी खनकने क्यूं न लगे मगर कोइ साया होता है उन पर | मगर सबकुछ छूट जाता है, अपने समय-समय पर... यही हकीकत होती है | जीवन की रेत पर फिसलते हैं तो यही अहसास हमें उनकी याद दिलाता है और एक उदासी, खामोशी और स्तब्धता की आगोश में हम अपना मुंह छुपाकर सिसकियाँ भर लेते हैं |
स्मृति की इस कविता को मैंने अपने अहसास में डूबती हुई पाई तो मेरे अंदर भी वही खामोशी छा गयी थी, शायद यही सफलता है ईस कविता की.....
मत ढूंढ उन हकीकतों को
जो रेत सी फिसल कर वक़्त की धारा में जा मिली हैं
bahut sundar abhivyakti
हकीकतों से यादों के वजूद होते है
यादो से हकीकतें नही बना करती
एक अतिसुन्दर कविता
बधाई
प्रेम की इतनी सकारात्मक अभिव्यक्ति.. बहुत सुन्दर..
haqeeqaton nse yadon ki wajood hoti hai
yaadon se haqeeqatein nahi bana kartein...
kya sahi baat kahi ho aapne!!!! what an awesome poem... love this poem ..every line of it ....smritiji its a joy to see your work here :)
वो जो नर्म छाँव थी, वो आज भी है,
वो जो हकीकत थे , वो सदा रहेंगे,
आंसुओं की श्रद्धांजलि ना देना,
उनको पसंद तेरी मुस्कान, तेरी ख़ुशी थी,
जो आज भी है, आज भी है !
wah smriti...kamaal ka likha hai aapne...aanand aa gaya.
यादों की थिरकन ...बहुत खूबसूरत
प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनायें।
आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (22/11/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com
'विश्वगाथा' के सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार |
हमने 1 - सितम्बर को ही ब्लॉग शुरू किया | आप सबके स्नेह की बदौलत आज सिर्फ 2 -महीने में ही 'विश्वगाथा' ने अपनी अलग छवि बनाई है | आप लोगों का साथ न होता तो ये संभव नहीं होता| मैं आप सबका आभारी हूँ |
वन्दनाजी ने "चर्चामंच" पर कईं रचनाओं को स्थान दिया है, दूसरे ब्लोगर भी हमें सहयोग दे रहे हैं | मैं चाहूँगा कि आप भी ज्यादा से ज्यादा दोस्तों को इस मंच पर ले आएं | प्रस्थापित और नए रचनाकारों ने 'विश्वगाथा' को अपना ही समझकर सहयोग दिया है | मेरे साथ मेरे प्रिय - श्री नरेन्द्र व्यासजी और सम्म्मानीय जया केतकी जी का अमूल्य योगदान रहा है |
सभी मित्रो और विश्व्गाथा के वासियों का मेरी रचना पर अपने विचार व्यक्त कर मुझे प्रोत्साहित करने का हार्दिक धन्यवाद...! :)
ये तलाश है उन हकीकतों की
जिनसे तू वजूद में आई
वाह!
सुन्दर रचना!
हकीकतों से यादों के वजूद होते हैं
यादों से हकीकतें नहीं बना करतीं
वाह, बहुत सुंदर रचना है...शुभकामनाएं।
first of all sorry for late response,,,,,,,,,,,, lovely creation
स्मृ्तियों और हकीकतों के अंतर्संबधों के धूपछांही संसार को उकेरती एक खूबसूरत एवं भावपर्ण अभिव्यक्ति. आभार.
सादर,
डोरोथी.
फ़िर मैं यादों की थिरकन को देख्ने लगती हूं स्तब्ध सी।
सुन्दर रचना। बधाई।
Dil ko bohot kareeb se chu gayi.. bohot hi utkrisht rachna.... loved it... hats off to U Smriti
excellent smruti.... very very touchy really made me emotional.... its truth of life smriti have no words really to justify what u have said...
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