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Pankaj Trivedi
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अतिथि-लघुकथा
वृत्ति - शमशाद इलाही अंसारी"शम्स"
शहर में दंगा होते ही अप्रत्याशित रुप से पुलिस -प्रशासन हरकत में आ गया, दोनों पक्षों के दंगाईयों और उनके मुस्टण्डों को पकड़ कर बंद कर दिया गया, शाम होते होते स्थिति नियंत्रण में कर ली गयी, जान माल की कोई विशेष हानि न होने दी गयी.
फ़िरे भी जाने क्यों रात होते होते, शहर के दोनों लडाकू समुदायों में अफ़वाहों का बाज़ार था, दोनों ही समुदायों में भारी रोष व्याप्त था.
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12 comments:
Afwahe hi sare vivad ki jad hoti hai
अफवाह वैमनस्य बढ़ाती हैं ....और इसी पर लोंग राजनीति करते हैं
afvaho ka janam aam insaan nhi deta balki kuchh swarthparast log hain jo is tarah ke kam ko anjam dete hain apni roti senkne ko..lekin ab hum bahut samjhdar ho gaye hain thoda darte jarur hain in sabsew lekin ab hum bhayebheet nhi hoe..
afvaho ka janam aam insaan nhi deta balki kuchh swarthparast log hain jo is tarah ke kam ko anjam dete hain apni roti senkne ko..lekin ab hum bahut samjhdar ho gaye hain thoda darte jarur hain in sabsew lekin ab hum bhayebheet nhi hote..
...नफरत की दुनिया नहीं चाहिए मुझे..क्यों है ये वैमनस्य..ये घृणा, ईर्ष्या, राग, द्वेष...घुटन होती है मुझे ऐसे माहौल में...
"चलो एक नयी दुनिया खोजें जहाँ प्यार की शायद किसी को ज़रुरत हो"
अफवाहें फैलाकर स्थितियां दुरूह बनायीं जाती हैं....
दुखद है!
Yeh laghu katha dobaara prakaashit huyee lagtee hai. Pahle padhee hai.
Bahut sankshep mein bahut kuchh kahtee hai.
रीना जी सच कह रही हैं, यह मैनें भी पहले पढ़ रखी है. अच्छा लगा दुबारा पढ़कर. बहुत कम शब्दों में बहुत कुछ कहती कहानी.
ाफवाहें जो कर जायें वही कम है। अच्छी लगी पोस्ट। शुभकामनायें।
भोर संग उठ कर ...
सांझ ढले लौटते ..
पंछी क्या गाते हैं ....
शायद अनहद के नाद से ..
मोती चुन कर लाते है ..
.कोई प्रेम गीत गाते हैं...
हमें जागते है ....
(संजीव गौतम)
२७/११/२०१०
हमें जगाते है ..
सभी सुधी पाठकों की अमूल्य टिप्पणियों का मैं तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूँ.
सादर
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