शमशाद इलाही अंसारी "शम्स"
माँ
आज
एक बार फ़िर मां को
उसके बच्चे ने
फ़िर से सताया,
उसका दिल तोड़ा
मां का रोम रोम, दर्द से
देर तक तड़पता रहा
इस दुख: और संताप के क्षणों में
हर बार की तरह
उसे, सुनाई पड़ी
ज़ोर ज़ोर से किसी बूढ़े के
हँसने की आवाज़
..अट्टाहस
जिसकी अनुगूँज
धकेल देती उसे
उसके अतीत के
किसी छाया चित्र में
जिसमें वह खुद को
अपने बच्चे की उम्र का देखती
और एक-एक कर
वह सभी दृश्य देखती
जिसमें उसकी माँ
असहाय रोती हुई
रिसती हुई
एक ओर खड़ी है।
ऐ...सुन ज़रा...!!!
जो बात तुझे तोड़ दे
जो भाव तुझे सहमा दे
जो भंगिमा तुझे कुरकुरा दे
जो संस्कार तुझे कुमल्हा दे
जो किताब तुझे कमज़ोरी दे
जो वाक्य तुझे शर्मा दे
जो नज़र तुझे "भोग्या" बना दे
जो कविता और जो कवि
जो ख्याल..
तेरी काम्यता के विचार बुने
जो हाथ तुझे सजा दे
किसी बाज़ार के लिये
जो एहसास तुझे भयातुर कर दे
जो धर्म
जो दृष्टिकोण, अवरुद्ध कर दे
तेरे नैसर्गिक विकास को
छीन ले तुझ से तेरी अपनी मुस्कान
रोप दे तेरे मस्तिषक में
एक अनचाहा गर्भ, जिसका बोझ
झुका देता है तेरी गर्दन, तेरी कमर
रोक लेता है तेरा यौवन.
इस कथित सभ्यता की गर्त ने
बना दिया है तुझे मात्र
एक अद्द्भुत आडंबर वाहिनी
सदियों पूर्व ही छीन लिया है
तुझ से तेरा उन्मुक्त यौवन.
तेरे जिस्म से
नज़र, धर्म, संस्कार जैसी एक-एक
आदिकालीन पत्तियों को मैं नौंच लेना चाहता हूँ
और, शरद ॠतु में ओक के पेड की तरह
नवजात, मौलिक और प्राकृतिक
बर्फ़ानी अंधडों में तेरा स्नान
जब बसंत आये, तब रोम रोम तेरा नया हो
सबलता, सुफ़ल, स्वावलांबन के फ़लों से
तेरा शरीर भर जाये
तू खिलखिला कर
सीधी कमर, सीधी गर्दन
आंख में आंख डाल कर
निडर होकर
दुनिया के सर्वोच्च शिखर पर खडे़ होकर
गर्व से कहे
मैं हूँ, मैं हूँ, मैं हूँ
एक स्त्री...!!
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22 comments:
बहुत ही मार्मिक पेशकश शम्स भाई जी की !!!!!!!!!!!!!Nirmal Paneri!
Nutan Gairola
February 1 at 10:40pm Reply • Report
शम्स जी की कविता बहुत अच्छी लगी.. किन्तु वह पर में कम्मेंट करने में असमर्थ हूँ | पोस्ट कमेन्ट नहीं खुल रहा है... खैर आपका ब्लॉग और शम्स जी की कविताएँ ..और योगराज प्रभाकर जी की लघुकथाये, ये दो पोस्ट मैं शुक्रवार को चर्चामंच पर रख रही हूँ .. आप यह सुनिश्चित करें की कमेन्ट क्यों नहीं जा रहें है.. धन्यवाद
nice
Devendra Nath Misra
February 2 at 2:05am Reply • Report
Shri Ansari "Shams ji ki kavitayen dukh ya shok pradhhaan hote hue bhi apne par vishwaas jagaati hain.Pahli kavita mein ek abalaa naari
Bachche se pareshaan dikhti hai.Parantu yahi sthiti use swapna jaisi awasthaa mein le jaati hai jahaan voh bachche ke sthaan par swayam apna bachpan dekhti hai jiskaa darshak kroor roop mein zor se hans rahaa hai.Shaayad use yeh kshan yaad dilaye ki voh bhi kabhi ek bachchi thee
doosri kavita mein bhi dukhi stree hai jise chaaron or se kathinayi dikhaai pad rahi hai yahaan tak ki usko apne vishwason par bhi aakraman prateet ho rahaa hai.Parantu dheere dheere uski aantarik shakti bhi jagati hai taaki voh zor se ,vishwaas se, yeh kah sake ki "Main Stree hoon".
Shri Ansari badhaai ke patra hain
Sanjay Mishra Habib
February 2 at 9:26am Reply • Report
सादगी के साथ गूढ़ सत्य को अनावृत करती इन रचनाओं के लिए 'शम्स' जी को बधाई...
dono rachnaayen gahan arth liye sunder. badhai.....
शम्स भाई, सादा बयानी से इतनी गहरी बात कह जाना आपकी काव्य-कला की एक बहुत बड़ी खूबी रही है जिसका कि मैं शुरू से ही कायल रहा हूँ ! इस दोनों सशक्त काव्य-कृतियों के लिए दिल से मुबारकबाद पेश करता हूँ !
Good tribute to woman hood Shams . Consumption is the Mantra of Modern Age .Why womanhood should be spared?
pranam !
achchi lavita achche abhivyakti ke liye sadhuwad .
saadar
Rupaba Jadeja
February 2 at 1:35pm Reply • Report
waaaaaaaaaaaah very nice " Mai hoon , main hoon ek stree" very touchy & thoughtful indeed!.... :-))
Ranjana Thakur
February 2 at 2:56pm Reply • Report
कभी संस्कार के नाम पर ,कभी सम्मान के नाम पर ,धर्म या रीती-रिवाज़ के बहाने स्त्री की भावनाओं को आदि काल से कुचला गया है ,उसकी पीड़ा और व्यथा की बहुत मार्मिक प्रस्तुति के लिए शम्स जी का धन्यवाद
Kiran Tiwari
February 2 at 4:36pm Reply • Report
bahut sundar aur bhavna pradhan rachna hai,meri ore se shams sahib ko badhai dijiyega.-regards.
Nand Kishore Sharma
February 2 at 5:04pm Reply • Report
ATI SUNDER.
REGARDS
Badhiya abhivyakti....
सबसे पहले विश्वगाथा, उनके संपादक पंकज जी का आभार, जिनके माध्यम से मैं आपके बीच उपस्थित हो सका हूँ और आपका प्रेम अर्जित कर रहा हूँ..बहन नूतन, सुमन जी और निर्मल जी, देवेन्द्र जी..आपने तो पूरी व्याख्या ही कर डाली..भाई योगराज जी, संजय, सुनील, रुपाबा जडेजा जी, रंजन, किशोर, कल्पना जी और डाक्टर सरकार साहब मैं आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ कि आपने अपने अमूल्य समय में से मुझे इन अतुलनीय शब्दों के मोती दान में दिये...आप जैसे पारखी अगर हैं तो अच्छा साहित्य भी रहेगा..और अगर कोई अच्छे साहित्य की प्रशंसा करता है तब यह कहा जा सकता है कि बदलाव की ताकतें समाज में मौजूद हैं. इन्ही ताकतों और प्रयासों को सलाम.
सादर
dono kavitaooon mei narri ko maaaa aur sitrrrii key roop mei darshayaaa gayaaa hei...dil karta hei keee nyce likh doooooonnn..magar koi hei jo majboor kartaa hei kucccch likhooon..shams jiii rachnayeee bahuut heee atiuttam hei..magar yahan mera ek heee swaal hei mattaooon behnooooo se ki MAAA KAAA ANCHAL SIKUDTTTA JAAA RAHA HEI..BAGHDOOR MEIM HUM KAHIN BACCHOON KO APNEY SE DOOR KARTEY JAA RAHE HEI..DEKHA DEKHI MEI..PLZ ANNCCHHAL BADDA KIJEEYE SIKUDAYEEE NAHIIII
शम्स जी कि ये कविताएँ आज चर्चामंच पर है... आप वह भी आये ..http://charchamanch.blogspot.com
Ansari Sb.
Hello
Aaj ki bhagti dorti dunia ki thakan se choor har manush ki soch main wowaqt aata hai jab wo us time ki yaad zaroor karta hai jis main woh ek pakchi ki taraha aazadi se dal dal ghuma karta tha."Koi lauta de mera bita hua Bachpan "
Dear Bhaw bhi achcha hai Sar bhi Achcha hai.Bas likhte raho to sabkuch achcha hi achcha hai.
With Wishes
Shami Naqvi
Director
Safa College Aligarh
India
जिसमें वह खुद को
अपने बच्चे की उम्र का देखती
और एक-एक कर
वह सभी दृश्य देखती
जिसमें ................................
निडर होकर
दुनिया के सर्वोच्च शिखर पर खडे़ होकर
गर्व से कहे
मैं हूँ, मैं हूँ, मैं हूँ
एक स्त्री.........................
भाई शमसाड जी वाकई अद्भुत प्रतिभा के धनी हैं आप| वाकई ग़ज़ब की धार है आपकी उपरोक्त पंक्तियों में| नमन|
शम्श जी बहुत सुन्दर रचना... भावपुर्ण..बधाई..
डा. नूतन जी, चर्चा मंच पर मेरी कवितायें (मां/ऐ सुन ज़रा) लाने और अपने नये पाठक वर्ग से मेरा परिचय कराने के लिये आपका बेहद शुक्रिया अदा करता हूँ, डा.शमीम नक्वी साहब, आपकी दुआयें और सर पर हाथ चाहिये, आपका प्रेम तो मेरे साथ है ही...नवीन जी, आपको धार पंसद आयी...शुक्रिया आपका और साथी अरुण जी...आपको भी धन्यवाद.
सादर
Shamsaad ji shukriya aapka ...
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