असीम सामर्थ्य तो अंदर है... ! - पंकज त्रिवेदी
फ्रांस में एक प्रसिद्द दार्शनिक हो गए, जिनका नाम हिया-ज्यो पोल सार्त्र | उसकी ज़िंदगी में कईं समस्याएँ थी, फिर भी उन्हों ने अपनी ज़िंदादिली पर उसे कभी हावी नहीं होने दी | वह अपने आप को उदासी और निराशा को दूर ही रखते थे | वह हमेशा आनंद में ही रहते थे | दूसरों को भी मुश्किलों के बीच आनंद में रहने की प्रेरणा देते थे |
सार्त्र की एक आँख पहले से ही खराब थी | उसे पढ़ने का बड़ा शौक था | डॉक्टरों ने सलाह दी थी कि पढ़ना-लिखना बिलकुल बंद कर दो, वर्ना दूसरी आँख भी गँवानी पड़ेगी | हालांकी सार्त्र ने कभी भी लेखन-पठान नहीं छोड़ा था | निष्क्रिय रहेना उसका काम ही न था | उन्हों ने अपने परिवार को मना लिया था कि प्रतिदिन एक पुस्तक पढ़कर कोई न कोई उन्हें सुनाएगा |
इस तरह परिवार की मदद से उन्हों ने अभ्यास किया और एम.ए. की डिग्री प्राप्त की थी | फिर वह खुद बोलते जाते और दूसरों से लिखवाते | ईस तरह उन्हों ने कईं पुस्तक भी लिखवाये | उस पुस्तक के द्वारा करोड़ों लोगों को आनंद और प्रेरणात्मक बातो से जीवन की नई राह मिली |
बुढापे में सार्त्र की दूसरी आँख भी खराब हो गयी | वह बिलकुल अंध हो गए मगर उन्हों ने कभी प्रसन्नता गँवाई नहीं | जो भी उन्हें मिलता वह सुखद ज़िंदगी के पाठ उनसे सीखते रहे | उन्हों ने अपने काम के कुछ घंटे निश्चित कर लिए थे |
ईस तरह सार्त्र ने अपनी कार्यशैली और आनंद से दुनिया को दिखाया कि प्रत्येक इंसान में असीम सामर्थ्य तो होता ही है | अगर मनुष्य को उसकी पहचान हो जाएँ और उसका उपयोग करें तो ज़िंदगी अत्यंत उच्च, सफल और आनंदमय बन जाएँ और समाज को भी फ़ायदा हो..|
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4 comments:
Is yug mein vyakti ka srijanatmak pahloo ubharna jaroori hai.
Samajik kalyan-hetu.
प्रसिद्द दार्शनिक, हिया-ज्यो पोल सार्त्र के बारे में यह जानकारी और एक प्रेरणा देने वाला लेख अत्यंत सार्थक लगा... धन्यवाद पंकज जी..
प्रेरक प्रसंग अच्छा लगा।
एक निवेदन-
मैं वृक्ष हूँ। वही वृक्ष, जो मार्ग की शोभा बढ़ाता है, पथिकों को गर्मी से राहत देता है तथा सभी प्राणियों के लिये प्राणवायु का संचार करता है। वर्तमान में हमारे समक्ष अस्तित्व का संकट उपस्थित है। हमारी अनेक प्रजातियाँ लुप्त हो चुकी हैं तथा अनेक लुप्त होने के कगार पर हैं। दैनंदिन हमारी संख्या घटती जा रही है। हम मानवता के अभिन्न मित्र हैं। मात्र मानव ही नहीं अपितु समस्त पर्यावरण प्रत्यक्षतः अथवा परोक्षतः मुझसे सम्बद्ध है। चूंकि आप मानव हैं, इस धरा पर अवस्थित सबसे बुद्धिमान् प्राणी हैं, अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि हमारी रक्षा के लिये, हमारी प्रजातियों के संवर्द्धन, पुष्पन, पल्लवन एवं संरक्षण के लिये एक कदम बढ़ायें। वृक्षारोपण करें। प्रत्येक मांगलिक अवसर यथा जन्मदिन, विवाह, सन्तानप्राप्ति आदि पर एक वृक्ष अवश्य रोपें तथा उसकी देखभाल करें। एक-एक पग से मार्ग बनता है, एक-एक वृक्ष से वन, एक-एक बिन्दु से सागर, अतः आपका एक कदम हमारे संरक्षण के लिये अति महत्त्वपूर्ण है
प्रेरक -प्रसंग ज्यां पाल सार्त्र के जीवन से उठाया आपने !
उनके बारे में जानकर अच्छा लगा !
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