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Pankaj Trivedi
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अतिथि-कविता
धड़कन - रंजना फत्तेपुरकर
लचकती शाखों पर खिलता गुलाब
याद तुम्हारी दिलाता है
सोचते हैं तुम्हारा नाम गुलाब रख दें
पर डरते हैं शाम के ढलते ही
कजरारी बदली में छुपा चाँद
याद तुम्हारी दिलाता है
सोचते हैं तुम्हारा नाम चाँद रख दें
पर डरते हैं सितारों के दीप बुझते ही
कहीं तुम छुप न जाओ
आओ तुम्हारा नाम धड़कन रख दें
ताकि जिन्दगी के रहते कभी साथ छोड़ न पाओ
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2 Comments
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2 comments:
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!
बहुत खुबसूरत, कोमल रचना...
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