Posted by
Pankaj Trivedi
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अतिथि-कविता
वह तुम्हारा है... भावना सक्सेना
क्यों चाहते हो
उसमें सब खूबियाँ
एक अच्छे इंसान की,
सुघड़ आदतें,
व्यवस्थित जीवन।
ताकि .....
उसे मेडल, ट्रॉफी की तरह
आगे कर सको
और कह सको-
देखो मेरा है
और उसे मिली
प्रशंसा को
अपनी टोपी में लगा सको
एक खूबसूरत पंख की तरह।
जीने दो उसे
उसका जीवन
अल्हड़,
बेपरवाह
संकोचहीन।
उसके अपने अनुभव
ढाल देंगे उसे
और तप कर बन जाएगा कुंदन।
जीने दो उसे
क्योंकि.....
वह तुम्हारा है,
बस तुम्हारा।
एक अच्छे इंसान की,
सुघड़ आदतें,
व्यवस्थित जीवन।
ताकि .....
उसे मेडल, ट्रॉफी की तरह
आगे कर सको
और कह सको-
देखो मेरा है
और उसे मिली
प्रशंसा को
अपनी टोपी में लगा सको
एक खूबसूरत पंख की तरह।
जीने दो उसे
उसका जीवन
अल्हड़,
बेपरवाह
संकोचहीन।
उसके अपने अनुभव
ढाल देंगे उसे
और तप कर बन जाएगा कुंदन।
जीने दो उसे
क्योंकि.....
वह तुम्हारा है,
बस तुम्हारा।
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8 Comments
This entry was posted on 10:09 PM and is filed under अतिथि-कविता . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.
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8 comments:
हर जिंदगी की अपनी खूबियाँ होती हैं और हर पडाव के अपने आदर्श....
.... अनुभव के ताने बाने
बताते हैं ज़िंदगी के माने....
सुन्दर अभिव्यक्ति....
सादर...
waah.. waah... badhaee.
ACHCHHEE KAVITA KE LIYE BHAVNA JI KO BADHAAEE
AUR SHUBH KAMNA.
adhikar ka arth swatantrata dena bhi hai...bahut khoob..
जीने दो उसे
उसका जीवन
अल्हड़,
बेपरवाह
संकोचहीन।
उसके अपने अनुभव
ढाल देंगे उसे
और तप कर बन जाएगा कुंदन।
Behad Sundar Abhivyakti.....
आप सभी को हार्दिक धन्यवाद !
sundar abhivyakti......
Sabhi chahte hainki unkaa hamsafar puri tarah se mature ho ,jiska ve pradarshan karenbina yeh soche hue balyawasthaa se adhed hone ke beech me yuvawastha aur age of innocence hoti hai jis umar ko bhi use jeene ka adhikar hona chahiye nain ko mansik tanaav jaisisthitiyaan paidaa hojaati hain.usko apne jeevan se prapta anubhav use mature karen
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