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pankaj trivedi
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चार लाइन
ज़ख्म - पंकज त्रिवेदी
कौन कहता हैं तुम नहीं हो यहाँ पर
यही ज़ख्म खड़े हैं झुककर यहाँ पर !
यह ज़ख्म भी बड़े शरारती हैं मेरे यार !
तुम्हारे न होने के बिच रुलाता है हमें !
यही ज़ख्म खड़े हैं झुककर यहाँ पर !
यह ज़ख्म भी बड़े शरारती हैं मेरे यार !
तुम्हारे न होने के बिच रुलाता है हमें !
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1 comments:
वाह भईया... बहुत खूब...
सादर
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