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Pankaj Trivedi
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अतिथि-कविता
कविता - रंजना फतेपुरकर
तुम्हारे गीतों ने मेरे अहसासों को
कुछ इस तरह छुआ है
जैसे बरसती बूंदों ने
कोमल पंखुरियों को छुआ है
जब भी गुनगुनाती है फिजाएं
लगता है रंगभरी बदलियों ने
इन्द्रधनुष छुआ है
खिलती कलियों ने
मुस्कराहट को इस तरह छुआ है
जैसे दिल में छुपे जज्बात को
किसी मीठी याद ने छुआ है
जब भी हवाएं आई हैं
तुम्हारी महक लेकर
लगता है जैसे किसी हसीं सपने ने
पलकों को छुआ है
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Pankaj Trivedi
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अतिथि-कविता
धड़कन - रंजना फत्तेपुरकर
लचकती शाखों पर खिलता गुलाब
याद तुम्हारी दिलाता है
सोचते हैं तुम्हारा नाम गुलाब रख दें
पर डरते हैं शाम के ढलते ही
कजरारी बदली में छुपा चाँद
याद तुम्हारी दिलाता है
सोचते हैं तुम्हारा नाम चाँद रख दें
पर डरते हैं सितारों के दीप बुझते ही
कहीं तुम छुप न जाओ
आओ तुम्हारा नाम धड़कन रख दें
ताकि जिन्दगी के रहते कभी साथ छोड़ न पाओ
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