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Pankaj Trivedi
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अतिथि-कविता
जीवन - भावना सक्सेना
कल काटे छाँटे वृक्ष की
नग्न शाख पर उतर आया चाँद
सहलाता हुआ सा
पत्रहीन अकेलेपन को
सींचता चाँदनी से......
तुम जीवन हो
फिर हरे भरे होंगे
कल, कल-कल स्वर
भर देंगे जीवन,
जीवन के आँगन में।
कुछ पत्र पुष्प छंट जाने से
जीवन का सार नहीं चुकता
जीवन मन का वह साहस है
जो कभी कहीं नहीं रुकता
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Pankaj Trivedi
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कविता
तेरे ही नाम से.... ! - पंकज त्रिवेदी
दिल हैं तो धड़कता हैं तेरे ही नाम से,
कहूं क्या ये लगन हैं तेरे ही नाम से |
तूं कौन, मैं हूँ कौन, हम क्यूं फ़िक्र करें ?
तूं कौन, मैं हूँ कौन, हम क्यूं फ़िक्र करें ?
भरोसा सिर्फ हमें यहाँ तेरे ही नाम से |
न चार दिन की ज़िंदगी, न सदियाँ यहाँ हैं,
जीना हैं यहाँ हमें तो सिर्फ तेरे ही नाम से |
तूं हैं या नहीं भी तो बात क्यूं करें हम ?
लोग हैं कहेंगे, मगर हूँ मैं तेरे ही नाम से !
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